Join Community
Stories

SHIVA

By admin Aug 11, 2026 32 Views

शिवा पहाड़ों पे अकेले ही अपने माँ और बाप के साथ रहता था। गाँव से कुछ दूर था उसका घर, गाँव के सब लड़के साथ में खेलते,स्कूल भी साथ आते जाते, उसका बस एक दोस्त बन पाया था जो अक्सर उसके घर आ जाता और शाम तक वापस हो जाता। उसने पहाड़ों से दोस्ती कर ली थी। पहाड़ों से रिसते पानी की धारे जो नीचे कही नदी में जा गिरती थी, कई बार जब बारिश होती वो सबसे अच्छी जगह जहाँ से कई पहाड़ एक साथ दिखते थे वहाँ चला जाता और अकेले ही उस मौसम में भीग जाता वो यूँ झूमता मानो आसमा उसी के लिए बरस रहा हो। सारी दुनिया उसके लिए ख़ुशियाँ बरसा रही हो । बारिश के बूँदे दूर दूर तक टपक रही हो। सब कुछ हरा भरा, नैसर्गिक सा हो जाता सब कुछ । उसने पहाड़ पे रहने वाले कई पक्षी, बंदरो और उसकी सबसे अच्छी दोस्त गिल्लु जो एक गिलहरी थी उससे दोस्ती कर ली थी। वो एक बहुत पुराने पेड़ पे रहती थी जिसने शायद कई सालों से उस पहाड़ पे अपना अस्तित्व बचा रखा था।

उसके पिता बहुत मेहनतकश थे, वो दिन भर पास के शहर में काम करके कुछ पैसे कमा पाते थे। माँ दिन भर घर सम्भालती। उस पहाड़ और उसके आस पास बहुत कम लोग थे। जो कभी कभी उसकी माँ और उसका हाल पूछने आ जाते। शिवा को हमेशा लगता था की उसके पिता के पास उसके लिए वक़्त नहीं है, वो उससे प्यार भी नहीं करते। वो जब भी कभी दिन में घर पे आते उसे बस पढ़ाई के बारे में पूछते, और उसके पढ़ाई में कमज़ोर होने पे ख़ूब डाँट लगाते। यही वजह थी वो पहाड़ों के ज़्यादा क़रीब था , कई बार वो अकेले ही निकल जाता। अब उसे अपने पिता से मिलने में भी कोई रुचि ना थी, वो जिस दिन घर पे रुकते वो पहाड़ पे निकल जाता।

वो अपनी माँ से अक्सर इस बारे में शिकायत करता की, पापा उसे कभी प्यार नहीं करते। ना वो शहर से कुछ खिलौने या कोई अच्छे कपड़े उसके लिए लाते, हमेशा आप ही फेरी वाले से मेरे लिए कुछ लेती हो। उसकी माँ उसे यही कहती की वो तुझे मुझसे भी ज़्यादा प्यार करते है।

शिवा फिर से बोल पड़ा झूठ बोलती हो आप मुझे क़तई यक़ीन नहीं, वो बस मुझे डाँट सकते है बस। शिवा अभी 14 साल का था। उसकी माँ कई बार उसकी बातें सुनकर आँसू से तर हो जाती पर कभी उसके सामने कभी नहीं रोती। वक़्त गुज़रता गया। शिवा अब 12वीं पास हो गया था अब उसके सारे दोस्त शहर जाने की तैयारी में थे। वक़्त के साथ शिवा भी शहर की चपेट में आ गया था। वो कई बार शहर घूम के आया था। वो चाहता था कि वो भी शहर में रहे, वही पढ़े।

आज रात जब उसके पिता घर पे आए उसने सीधे उनसे कहा कि मुझे आपसे कुछ बात करनी है। उन्होंने भी कहा हाँ कहो शायद वो बहुत ख़ुश थे की इतने सालों बाद आज ख़ुद शिवा कुछ कह रहा है वैसे वो ही हमेशा उससे उसकी पढ़ाई के बारे में पूछते रहते थे। उसने कहा मुझे शहर जाना है। वहीं पढ़ाई करनी है। मेरे सारे स्कूल के लड़के जा रहे है। शिवा की माँ उदास थी , क्यूँकि उन्हें पता था की वो इतने अमीर ना थे की वो ये ख़र्च उठा सके। उसकी माँ यूँ भी कोई बात छिपाती थी शिवा से। उसके पिता ने हाँ कह दी। उसकी माँ को भी आश्चर्य हुआ, की ये कैसे करेंगे।

शिवा आज बहुत ख़ुश था, शायद उसने सोचा भी ना था। की उसे शहर जाने को मिलेगा। वहाँ पढ़ने को मिलेगा। वक़्त गुजरता गया।मई गुज़र चुकी थी, जून जा वक़्त था एक अलग दिन था। कुछ मायूस सा, शिवा उन्ही पहाड़ों पे था वो उन सब चीज़ों को शुक्रिया कर रहा था। उन पहाड़ों से, नदी से , पेड़ों से , पंछियों से की उन्होंने उसे सबसे ज़्यादा प्यार दिया है, अगर वो ना होते तो उसकी ज़िंदगी का कोई मतलब ना था। शायद वो कहना चाह रहा था की उसके पिता से भी ज़्यादा वो उनका शुक्र गुज़र है। वो बहुत उदास भी था उन्हें छोड़ने को लेकर। वो दिन ही कुछ मायूस था, एक आदमी पहाड़ के रास्तों से आता है वो शिवा से पूछता है तुम्हारी माँ कहा है शिवा कहता है घर पर, वो जल्द ही उसे घर चलने को कहता है। शिवा घबरा जाता है पूछता है क्या हुआ ? वो जैसे ही घर पहुँचते है शिवा की माँ को आवाज़ देता हुए वो आदमी बुलाता है और कहता है शिवा के पापा नहीं रहे। उनका हॉस्पिटल में देहांत हो गया। उसकी माँ की आँखें तर हो जाती है। वो शायद पहले से जानती थी। वो पहले ही कई बार शायद आँसुओं से तर हो चुकी थी। शिवा सदमे में है उसे कुछ समझ नहीं आ रहा है। वो बस माँ के रोने में रोने लगता है। शहर पहुँच के वो उसका शव गाँव लाते है। शिवा उन्हें मुखाग्नि देता है। शिवा अपनी माँ को सम्भालने की कोशिश करता है, उसकी माँ बेसुध सी बस उसे देख रही होती है।

कुछ दिन बाद वो दोपहर में पहाड़ों पे बैठा था की अचानक वो भाग पड़ता है। शायद उसे कुछ याद आता है वो बहुत तेज़ भागता हुआ आता है और घर पहुँच के पापा की वो अलमीरा की वो दराज़ तोड़ता है जिसे उन्होंनेकभी शिवा को छूने नहीं दिया। उसकी नज़र सबसे पहले कैन्सर की रिपोर्ट्स पे पड़ती है वो बेसुध हो जाता है, वो सब पढ़ता है उसके पिता को कई साल से कैन्सरथा और उन्हें पता था की वो लास्ट स्टेज पे थे। फिर वो उनकी डायरी को पढ़ता है जिससे उन्होंने उसकी हर वो ख़्वाहिश लिख रखी थी जो वो पूरी ना कर सके।

उस डायरी में बैंक अकाउंट्स भी थे जिनमे काफ़ी पैसा जमा किए थे। वो कई सालों से वो कुछ कुछ पैसे जोड़ के रख रहे थे। उसमें एक लेटर था , शिवा तुरंत उस लेटर को खोलता है। उसमें लिखा था

"शिवा मुझे पता था कि एक ना एक दिन तुम इसे ज़रूर पढ़ोगे,

मैं इतना ग़रीब था की तुम्हारी कई ख़्वाहिशें पूरी ना कर सका,

पर एक बाप इतना अमीर ज़रूर था कि तेरी सबसे ज़रूरी चीज़ पूरी कर सके" मैंने इतने पैसे जुटा दिए है की तुम अपनी पढ़ाई आराम से कर सको शहर में, और मुझे पता है की उसके बाद मेरे बेटे को पैसों की ज़रूरत कभी नहीं पड़ेगी, अपनी माँ का ख़्याल रखना"

शिवा आँसुओं से तर है की उसने कभी उन्हें गले से क्यूँ नहीं लगाया।

#krantik